भाद्रपद अमावस्या 2025: पितरों को प्रसन्न करने का शुभ अवसर

हिन्दू पंचांग के अनुसार 23 अगस्त 2025, शनिवार को भाद्रपद अमावस्या मनाई जाएगी। यह तिथि इस बार और भी खास है क्योंकि यह दिन शनि अमावस्या का दुर्लभ योग लेकर आ रहा है। भाद्रपद अमावस्या को पितरों की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

भाद्रपद अमावस्या 2025 की तिथि और समय

  • तिथि आरंभ: 22 अगस्त 2025, रात्रि 10:52 बजे
  • तिथि समाप्त: 23 अगस्त 2025, रात्रि 11:45 बजे तक

भाद्रपद अमावस्या का महत्व

भाद्रपद अमावस्या को “पिठोरी अमावस्या” भी कहा जाता है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना से विशेष व्रत और पूजा करती हैं। साथ ही, यह दिन पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए भी बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किया गया पितृ पूजन और तर्पण आत्माओं को तृप्त करता है और परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है।

शनि अमावस्या 2025 का विशेष महत्व

इस बार भाद्रपद अमावस्या शनिवार को पड़ रही है, जिससे यह दिन शनि अमावस्या बन रहा है। इस संयोग में शनि देव की विशेष आराधना से:

  • शनि दोष से मुक्ति मिलती है।
  • कर्म सुधार का अवसर मिलता है।
  • जीवन में बाधाएँ और कष्ट दूर होते हैं।

लोग इस दिन काले तिल, सरसों का तेल, काला वस्त्र और लोहे का दान करते हैं। साथ ही, “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

भाद्रपद अमावस्या पर क्या करें?

 सुबह स्नान कर पवित्र नदी या जल में तर्पण करें।
  पितरों को जल, तिल और अन्न अर्पित करें।
  जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और दान दें।
  शनि देव की आराधना करें और दीपदान करें।
माता शक्ति की पूजा कर बच्चों के लिए मंगलकामना करें।

भाद्रपद अमावस्या पर क्या न करें?

 क्रोध, झूठ और अपमान से बचें।
  पेड़-पौधों की कटाई या अनावश्यक हिंसा न करें।
  अपवित्र भोजन और नशे का सेवन न करें।

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