भाई-बहन का रिश्ता दुनिया के सबसे पवित्र रिश्तों में से एक माना जाता है।
यह सिर्फ खून का रिश्ता नहीं बल्कि भरोसे, प्यार और जिम्मेदारी का अटूट बंधन है। बहन हमेशा भाई को सुरक्षा का प्रतीक मानती है और भाई भी हर परिस्थिति में अपनी बहन का सहारा बनने का वादा करता है। संत प्रेमानंद महाराज ने भाई की बहन के प्रति 5 प्रमुख जिम्मेदारियों का ज़िक्र किया है, जिनमें से चौथी बात हर किसी का दिल छू लेती है।
1. सुरक्षा देना
भाई का पहला धर्म है कि वह अपनी बहन को हमेशा सुरक्षित महसूस कराए। चाहे समाज हो या परिवार, बहन को यह भरोसा होना चाहिए कि उसका भाई हर समय उसके साथ खड़ा है।
2. सम्मान और आदर देना
भाई को चाहिए कि वह हमेशा बहन की भावनाओं और उसकी इच्छाओं का सम्मान करे। बहन को बराबरी का दर्जा देना भाई की अहम जिम्मेदारी है।
3. मुश्किल समय में सहारा बनना
जीवन में हर किसी को उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं। बहन की कठिनाइयों में भाई उसका संबल बनकर खड़ा रहे, यह रिश्ता और मजबूत बनाता है।
4. बहन की खुशी को अपनी खुशी समझना
प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि भाई की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है अपनी बहन की खुशी को खुद की खुशी समझना। जब बहन मुस्कुराती है तो भाई का जीवन भी सुखमय हो जाता है। यही वह बात है जो हर दिल को छू लेती है।
5. जीवनभर साथ निभाना
रिश्ता सिर्फ बचपन तक सीमित नहीं होता। बड़े होने के बाद भी भाई-बहन का बंधन उतना ही मजबूत रहना चाहिए। भाई का कर्तव्य है कि वह हर पड़ाव पर अपनी बहन का साथ दे।